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à¤à¤• हरà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ गà¥à¤¹à¤¾ की दीवार में à¤à¤• दोष के माधà¥à¤¯à¤® से à¤à¤• अंग का फलाव या अंग का आवरण होता है जिसमें सामानà¥à¤¯ रूप से यह होता है। सबसे आम हरà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ पेट में विकसित होते हैं, जब पेट की अंदरूनी परतें कमजोर हो जाती हैं। इसका परिणाम à¤à¤• उà¤à¤¾à¤° या आंसू होता है। ऊपरी जांघ में, आपकी नाà¤à¤¿ के पास या कमर के कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में हरà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ à¤à¥€ हो सकता है। यह काफी दरà¥à¤¦à¤¨à¤¾à¤• हो सकता है, खासकर खांसने, उठाने या पेट पर दबाव डालने वाली कोई à¤à¥€ गतिविधि करने के दौरान।
हरà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ के लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ में बà¥à¤–ार, तेज दरà¥à¤¦, मतली, उलà¥à¤Ÿà¥€, à¤à¤• लाल या बैंगनी उà¤à¤¾à¤° और मल पास करने में असमरà¥à¤¥à¤¤à¤¾à¥¤
हरà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ का उपचार नामक पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ किया जाता है herniorrhaphy or हरà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¥‹à¤ªà¥à¤²à¤¾à¤¸à¥à¤Ÿà¥€à¥¤
हरà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ के पà¥à¤°à¤•ार
सबसे आम पà¥à¤°à¤•ार के हरनिया यह है:
ऊरà¥: यह ऊपरी जांघ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° या बाहरी गà¥à¤°à¥‹à¤‡à¤¨ में होता है।
आकसà¥à¤®à¤¿à¤•: कई बार पेट की सरà¥à¤œà¤°à¥€ के बाद इस पà¥à¤°à¤•ार का हरà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ हो सकता है।
वेंटà¥à¤°à¤²: सामानà¥à¤¯ पेट या उदर दीवार में होता है।
हयाताल: इस पà¥à¤°à¤•ार का हरà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ तब होता है जब आपके पेट के ऊतक का à¤à¤• टà¥à¤•ड़ा आपके डायाफà¥à¤°à¤¾à¤® के माधà¥à¤¯à¤® से छाती की गà¥à¤¹à¤¾ में चिपक जाता है। हाइटल हरà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ 50 वरà¥à¤· और उससे अधिक आयॠके वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में आम है।
पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾
पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ से पहले
हरà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ के निदान के लिठआमतौर पर à¤à¤• शारीरिक परीकà¥à¤·à¤¾ परà¥à¤¯à¤¾à¤ªà¥à¤¤ होती है।
इस जांच के दौरान डॉकà¥à¤Ÿà¤° पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में उà¤à¤¾à¤° की जांच करता है।
वह रोगी को खड़े होने, खिंचाव या खांसी करने के लिठकहता है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि यह हरà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ को अधिक पà¥à¤°à¤®à¥à¤– बनाता है और निदान में मदद करता है।
डॉकà¥à¤Ÿà¤° रोगी के चिकितà¥à¤¸à¤¾ इतिहास और लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ के बारे में à¤à¥€ पूछता है।
यदि डॉकà¥à¤Ÿà¤° उà¤à¤¾à¤° का पता नहीं लगा सकता है, तो इमेजिंग परीकà¥à¤·à¤£ जैसे कि अलà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾à¤¸à¤¾à¤‰à¤‚ड, सीटी सà¥à¤•ैन or à¤à¤®à¤†à¤°à¤†à¤ˆ हरà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ के अधिक सटीक निदान के लिठआवशà¥à¤¯à¤• हो सकता है।
रकà¥à¤¤ परीकà¥à¤·à¤£, रकà¥à¤¤à¤šà¤¾à¤ª माप और ठजैसे पà¥à¤°à¥€à¤‘परेटिव आकलन ईसीजी पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ से पहले आवशà¥à¤¯à¤• हैं।
à¤à¤• हरà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ सरà¥à¤œà¤°à¥€ सामानà¥à¤¯ संजà¥à¤žà¤¾à¤¹à¤°à¤£ या à¤à¤ªà¤¿à¤¡à¥à¤¯à¥‚रल à¤à¤¨à¥‡à¤¸à¥à¤¥à¥‡à¤¸à¤¿à¤¯à¤¾ के तहत की जा सकती है।
पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ से पहले मरीजों को खाली पेट रहना चाहिà¤à¥¤
पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ के दौरान
हरà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ की सरà¥à¤œà¤°à¥€ के तीन मà¥à¤–à¥à¤¯ तरीके ओपन, लैपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥à¤•ोपिक और रोबोटिक हैं।
खà¥à¤²à¤¾ या पारंपरिक दृषà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ोण:
à¤à¤• खà¥à¤²à¥€ हरà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ की मरमà¥à¤®à¤¤ सामानà¥à¤¯ रूप से सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥€à¤¯ संजà¥à¤žà¤¾à¤¹à¤°à¤£ और अंतःशिरा बेहोश करने की कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ के तहत की जाती है। हालांकि, यह सामानà¥à¤¯ संजà¥à¤žà¤¾à¤¹à¤°à¤£ के तहत à¤à¥€ किया जा सकता है।
तà¥à¤µà¤šà¤¾ में तीन से चार इंच के चीरे के माधà¥à¤¯à¤® से à¤à¤• खà¥à¤²à¥€ या पारंपरिक हरà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ सरà¥à¤œà¤°à¥€ की जाती है।
हरà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ के सà¥à¤¤à¤° तक पहà¥à¤‚चने के लिà¤, चमड़े के नीचे की वसा और मांसपेशियों के माधà¥à¤¯à¤® से चीरा बढ़ाया जाता है।
हरà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ की सामगà¥à¤°à¥€ को छेद के माधà¥à¤¯à¤® से अपनी मूल सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में वापस धकेल दिया जाता है।
इस बिंदॠपर, दोष को ठीक करने के लिठछेद के माधà¥à¤¯à¤® से सरà¥à¤œà¤¿à¤•ल जाल का à¤à¤• टà¥à¤•ड़ा रखा जाता है। इसके बाद इसे सिवनी से सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ किया जाता है।
लैपà¥à¤°à¥‹à¤¸à¥à¤•ोपिक हरà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ सरà¥à¤œà¤°à¥€:
रोबोटिक हरà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ की मरमà¥à¤®à¤¤:
शलà¥à¤¯ चिकितà¥à¤¸à¤¾ जाल:
पà¥à¤°à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ के बाद
हरà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ की सरà¥à¤œà¤°à¥€ के बाद जननांग कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ में सूजन और कमर में दà¥à¤°à¤µ का जमाव हो सकता है। कà¤à¥€-कà¤à¥€, यह गांठकी तरह सखà¥à¤¤ महसूस हो सकता है। सूजन को कम करने में मदद करने के लिठआइस पैक या जमे हà¥à¤ मटर के बैग को घà¥à¤®à¤¾à¤à¤‚ (पहले 15 दिनों के लिठपà¥à¤°à¤¤à¤¿ घंटे 3 मिनट तक)।
चीरे को सूखा रखें। अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• पसीने से बचें। लोशन, मलहम या कà¥à¤°à¥€à¤® न लगाà¤à¤‚।
आवशà¥à¤¯à¤•तानà¥à¤¸à¤¾à¤° उपयोग करने के लिठआपको à¤à¤• पà¥à¤°à¤¿à¤¸à¥à¤•à¥à¤°à¤¿à¤ªà¥à¤¶à¤¨ सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤‚थ पेन मेडिकेशन à¤à¥€ पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ किया जाà¤à¤—ा।
शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤à¥€ 24 घंटों के लिठकेवल सà¥à¤ªà¤·à¥à¤Ÿ तरल पदारà¥à¤¥à¥‹à¤‚ का सेवन करें। धीरे-धीरे, आप अपना आहार आगे बढ़ा सकते हैं। कबà¥à¤œ का धà¥à¤¯à¤¾à¤¨ अवशà¥à¤¯ रखें।
जटिलताओं
वंकà¥à¤·à¤£ हरà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ की मरमà¥à¤®à¤¤ के लिठसरà¥à¤œà¤°à¥€ आम तौर पर सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ होती है और जटिलताà¤à¤‚ असामानà¥à¤¯ होती हैं। संà¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ जोखिमों के बारे में जागरूक होने से मरीज ऑपरेशन के बाद के लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ के होते ही अपने डॉकà¥à¤Ÿà¤° को रिपोरà¥à¤Ÿ कर सकते हैं। à¤à¤¸à¥‡ कà¥à¤› जोखिम हैं:
हरà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ की पà¥à¤¨à¤°à¤¾à¤µà¥ƒà¤¤à¥à¤¤à¤¿
खून बह रहा है
घाव संकà¥à¤°à¤®à¤£
दरà¥à¤¦à¤¨à¤¾à¤• निशान
आंतरिक अंगों में चोट
मूतà¥à¤° पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤§à¤¾à¤°à¤£
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